
चीन की तान बनी विश्व महिला शतरंज चैम्पियन


पदमिनी ,जू वेंजून और हारिका द्रोणावली को पराजित करते हुए तान नें एक के बाद एक उलटफेर किए और खिताब तक का उनका सफर किसी सपने के सच होने जैसा रहा । जिन पर सब की नजरे थी वो एक एक करके बाहर होते गए और चीन की तान नें अपने खेल की लय से विश्व चैम्पियन का तमगा हासिल कर लिया , कहना होगा की तान का साहस और लगन किसी अन्य से बेहतर था वो कई बार बुरी तरह हार के भी वापसी करती रही और देखिये वो आज विश्व चैम्पियन बन गयी

बार –बार की वापसी – तान पहले पदमिनी से हारकर लगभग बाहर होने की कगार पर थी और क्लासिकल मुक़ाबला बराबर रहने की वजह से टाईब्रेक में पहला मैच हार गयी थी पर उन्होने वापसी की और तीन में से दो मैच जीतकर पदमिनी को ही बाहर कर दिया । वही हारिका के खिलाफ भी वह पहला टाईब्रेक हारकर बाहर होने की स्थिति में थी पर उन्होने वापसी की और उस मैच में तो 7 टाईब्रेक में से अंतिम मैच जीतकर उन्होने फ़ाइनल में जगह बनाई थी ऐसा लग रहा था जैसे किस्मत ही उन्हे विश्व चैम्पियन बनना देखना चाहती थी ।

तान नें अपने चरित्र में गज़ब के धैर्य का परिचय दिया है ऐसा लगा जैसे वो मशीनों की तरह अपनी हार से बेपरवाह अगले ही मैच में जीत को तलाशती नजर आती थी किसी नें कहा भी है परिस्थियाँ चाहे जैसी भी हो आखिर हमे जो करना है वो तो करना ही होगा ! यह बात दुनिया को समझनी होगी की चीन नें महिला शतरंज के मामले में दुनिया के अन्य देशो को कंही पीछे छोड़ दिया है

फ़ाइनल मुक़ाबला 4 क्लासिकल मैच में था जिसमें दोनों खिलाड़ियों नें 1 मैच जीते और दो ड्रॉ हुए इस कारण टाईब्रेक में खेल गया और वहाँ पहला मुक़ाबला ड्रॉ छूटा तो दूसरा तान नें जीतकर इतिहसिक जीत दर्ज की । इस तरह तान को स्वर्ण , अन्ना को रजत और भारत की हारिका व रूस की अलेक्ज़ेंड्रा को कांस्य पदक से नवाजा गया







देखे सीखे और डाउन लोड करे मैच को
इस विश्व चैंपियनशिप की सभी हिन्दी लेख पढ़ने के लिए देखे - चेसबेस इंडिया हिन्दी पेज
निकलेश जैन








