पूर्व विश्व चैंपियन गैरी कास्पारोव ने कहा है कि विश्व चैंपियन डी गुकेश को लेकर उनकी आलोचना "अब भी कायम है", लेकिन आगामी विश्व चैंपियनशिप मुकाबले में वे जावोखिर सिंदारोव के मुकाबले गुकेश को थोड़ा बेहतर मौका देते हैं। कास्पारोव ने 21 अक्टूबर को एंटवर्प में केएमएसकेए संग्रहालय में होने वाले सिमुल्टेनियस प्रदर्शन से पहले एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में यह बात कही। यह जानकारी "स्पोर्ट इन एंटवर्पेन" ने प्रकाशित की है।Sport in Antwerpen.

Gukesh Dommaraju and Javokhir Sindarov at the Chess Olympiad in Samarkand | Photo: Michal Walusza

"वह आलोचना अब भी कायम है"

कास्पारोव ने 2024 में विश्व चैंपियनशिप जीतने के बाद से गुकेश की फ़ॉर्म की आलोचना की। उन्होंने कहा, "मैग्नस कार्लसन की तरह मैंने भी गुकेश की कड़ी आलोचना की थी और वह आलोचना अब भी कायम है।" उन्होंने यह भी कहा कि ओलंपियाड में गुकेश ने अच्छा प्रभाव नहीं छोड़ा, लेकिन किसी एक प्रतिद्वंदी के खिलाफ मैच "पूरी तरह अलग" होता है।

13th and 18th World Champions! | Photo: Lennart Ootes

गुकेश को बढ़त क्यों

कास्पारोव ने कहा, "जहाँ तक मैं आँक सकता हूँ, सिंदारोव ज़्यादा मनोरंजक शतरंज खेलते हैं, लेकिन अनुभव मायने रखता है और गुकेश के पास वह है। गुकेश को हराना बेहद मुश्किल है। इसीलिए मैं उन्हें थोड़ा ज़्यादा मौका देता हूँ।" उन्होंने आगे कहा, "मैच की तैयारी कितने समय तक की गई, यह अहम नहीं है। आमतौर पर अनुभव ही निर्णायक साबित होता है।"

कास्पारोव ने गुकेश को रक्षात्मक खिलाड़ी बताते हुए उनकी तुलना "बेसलाइन से आगे न आने वाले टेनिस खिलाड़ी" से की। हालाँकि उन्होंने सिंदारोव की संभावनाओं को नकारा नहीं और कहा, "कुछ भी कहा नहीं जा सकता। अगर सिंदारोव बढ़त ले लेते हैं, तो वे गुकेश को हरा भी सकते हैं।"

Sindarov and Kasparov at the Grand Chess Tour in Bucharest, Romania | Photo: Grand Chess Tour

कार्लसन अब भी सबसे मज़बूत

कास्पारोव ने यह भी कहा कि उनकी नज़र में मैग्नस कार्लसन अब भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं। उनके अनुसार कुछ साल पहले इसमें कोई संदेह नहीं था, लेकिन कार्लसन की जीवनशैली और कम टूर्नामेंट खेलने के कारण अन्य खिलाड़ी भी उभरकर आए हैं। उन्होंने कहा, "सब कुछ मिलाकर देखें तो वे अब भी सबसे मज़बूत खिलाड़ी हैं।"

The famous photo of Kasparov working on chess with Carlsen

कास्पारोव ने युवा खिलाड़ियों के उभार का स्वागत करते हुए कहा, "मुझे खुशी है कि अब युवा खिलाड़ी शीर्ष तक पहुँच रहे हैं।" साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब विश्व खिताब के मुकाबले दुनिया के नंबर एक और नंबर दो खिलाड़ी के बीच नहीं होते, जैसा कि 1986 में उनके और कार्पोव के बीच हुआ था।

( इस लेख को अंग्रेजी में सागर साह जी के लिखे मूल लेख से हिन्दी में निकलेश जैन नें अनुवादित किया है)