पूर्व विश्व चैंपियन गैरी कास्पारोव ने कहा है कि विश्व चैंपियन डी गुकेश को लेकर उनकी आलोचना "अब भी कायम है", लेकिन आगामी विश्व चैंपियनशिप मुकाबले में वे जावोखिर सिंदारोव के मुकाबले गुकेश को थोड़ा बेहतर मौका देते हैं। कास्पारोव ने 21 अक्टूबर को एंटवर्प में केएमएसकेए संग्रहालय में होने वाले सिमुल्टेनियस प्रदर्शन से पहले एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में यह बात कही। यह जानकारी "स्पोर्ट इन एंटवर्पेन" ने प्रकाशित की है।Sport in Antwerpen.

"वह आलोचना अब भी कायम है"
कास्पारोव ने 2024 में विश्व चैंपियनशिप जीतने के बाद से गुकेश की फ़ॉर्म की आलोचना की। उन्होंने कहा, "मैग्नस कार्लसन की तरह मैंने भी गुकेश की कड़ी आलोचना की थी और वह आलोचना अब भी कायम है।" उन्होंने यह भी कहा कि ओलंपियाड में गुकेश ने अच्छा प्रभाव नहीं छोड़ा, लेकिन किसी एक प्रतिद्वंदी के खिलाफ मैच "पूरी तरह अलग" होता है।

गुकेश को बढ़त क्यों
कास्पारोव ने कहा, "जहाँ तक मैं आँक सकता हूँ, सिंदारोव ज़्यादा मनोरंजक शतरंज खेलते हैं, लेकिन अनुभव मायने रखता है और गुकेश के पास वह है। गुकेश को हराना बेहद मुश्किल है। इसीलिए मैं उन्हें थोड़ा ज़्यादा मौका देता हूँ।" उन्होंने आगे कहा, "मैच की तैयारी कितने समय तक की गई, यह अहम नहीं है। आमतौर पर अनुभव ही निर्णायक साबित होता है।"
कास्पारोव ने गुकेश को रक्षात्मक खिलाड़ी बताते हुए उनकी तुलना "बेसलाइन से आगे न आने वाले टेनिस खिलाड़ी" से की। हालाँकि उन्होंने सिंदारोव की संभावनाओं को नकारा नहीं और कहा, "कुछ भी कहा नहीं जा सकता। अगर सिंदारोव बढ़त ले लेते हैं, तो वे गुकेश को हरा भी सकते हैं।"

कार्लसन अब भी सबसे मज़बूत
कास्पारोव ने यह भी कहा कि उनकी नज़र में मैग्नस कार्लसन अब भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं। उनके अनुसार कुछ साल पहले इसमें कोई संदेह नहीं था, लेकिन कार्लसन की जीवनशैली और कम टूर्नामेंट खेलने के कारण अन्य खिलाड़ी भी उभरकर आए हैं। उन्होंने कहा, "सब कुछ मिलाकर देखें तो वे अब भी सबसे मज़बूत खिलाड़ी हैं।"

कास्पारोव ने युवा खिलाड़ियों के उभार का स्वागत करते हुए कहा, "मुझे खुशी है कि अब युवा खिलाड़ी शीर्ष तक पहुँच रहे हैं।" साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब विश्व खिताब के मुकाबले दुनिया के नंबर एक और नंबर दो खिलाड़ी के बीच नहीं होते, जैसा कि 1986 में उनके और कार्पोव के बीच हुआ था।
( इस लेख को अंग्रेजी में सागर साह जी के लिखे मूल लेख से हिन्दी में निकलेश जैन नें अनुवादित किया है)
















