समरकंद (उज़्बेकिस्तान), (निकलेश जैन): 46वें फीडे शतरंज ओलंपियाड में महिला वर्ग का खिताब चीन ने अपने नाम किया। अंतिम राउंड में वियतनाम को 3-1 से हराकर चीन ने 20 मैच पॉइंट के साथ स्वर्ण पदक जीता। कज़ाख़स्तान ने 18 मैच पॉइंट के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि भारतीय टीम ने अंतिम राउंड में जॉर्जिया के साथ 2-2 से मुकाबला बराबरी पर छोड़ते हुए 17 मैच पॉइंट के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। अमेरिका, पोलैंड, आर्मेनिया और मंगोलिया भी 17-17 मैच पॉइंट के साथ बराबरी पर रहीं, लेकिन बेहतर गेम पॉइंट टाईब्रेक (424) की बदौलत भारत इन सभी टीमों से आगे रहकर तीसरे स्थान पर काबिज हुआ।

अंतिम राउंड में भारत का मुकाबला जॉर्जिया के खिलाफ रोमांचक रहा। शीर्ष बोर्ड पर हम्पी कोनेरू ने नाना जागनिद्ज़े को हराकर टीम को बढ़त दिलाई। दूसरे बोर्ड पर दिव्या देशमुख को बेला खोतेनाश्विली के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा, जिससे बढ़त गंवानी पड़ी। तीसरे बोर्ड पर वंतिका अग्रवाल का मुकाबला लेला जावाखिश्विली के साथ और चौथे बोर्ड पर सविता श्री बी का मुकाबला मेरी अराबिद्ज़े के साथ ड्रॉ पर छूटा, जिससे मुकाबला 2-2 से बराबरी पर समाप्त हुआ। इसी बीच शीर्ष टेबल पर चीन ने वियतनाम को 3-1 से हराकर खिताब पक्का किया, जिसमें झू जिनर और लू मियाओयी ने जीत दर्ज की, जबकि दूसरे टेबल पर पोलैंड और कज़ाख़स्तान के बीच मुकाबला 2-2 से बराबरी पर छूटा, जिसमें एल्नाज़ कालियाख़मेत की जीत की बदौलत कज़ाख़स्तान रजत पदक हासिल करने में कामयाब रहा।

भारतीय महिला टीम का अभियान भी शुरू से आखिर तक उतार-चढ़ाव भरा रहा। टीम ने पहले चार राउंड में डोमिनिकन गणराज्य, फिनलैंड, ग्रीस और मंगोलिया को हराकर धमाकेदार शुरुआत की, लेकिन पांचवें राउंड में पोलैंड के खिलाफ 1.5-2.5 से हारकर अभियान का पहला झटका झेला। इसके तुरंत बाद टीम ने अमेरिका को 3-1 से हराकर शानदार वापसी की और सातवें राउंड में जर्मनी को 3.5-0.5 से रौंदा। आठवें राउंड में कज़ाख़स्तान के खिलाफ मुकाबला 2-2 से बराबरी पर छूटा, जबकि नौवें राउंड में टीम ने मेजबान उज़्बेकिस्तान को 3-1 से हराकर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। दसवें राउंड में शीर्ष टीम चीन के खिलाफ मुकाबला 2-2 से ड्रॉ रहा, और अंतिम राउंड में जॉर्जिया के साथ भी बराबरी पर मुकाबला छूटा।

बोर्ड-वार व्यक्तिगत पुरस्कारों में भारतीय महिला टीम के लिए यह टूर्नामेंट शानदार रहा और चार में से चार भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते। आरक्षित बोर्ड (बोर्ड पांच) पर सविता श्री बी ने 2569 की शानदार परफॉर्मेंस रेटिंग के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि वियतनाम की न्गुयेन थी मई हुंग (2395) रजत और स्लोवेनिया की वेस्ना मिहेलिच (2311) कांस्य पदक जीतने में कामयाब रहीं। बोर्ड तीन पर दिव्या देशमुख ने 2464 की परफॉर्मेंस के साथ रजत पदक अपने नाम किया, जहां चीन की लू मियाओयी (2576) ने स्वर्ण और जॉर्जिया की बेला खोतेनाश्विली (2408) ने कांस्य पदक हासिल किया। बोर्ड एक पर हम्पी कोनेरू ने 2543 की परफॉर्मेंस के साथ कांस्य पदक जीता, जबकि चीन की झू जिनर (2638) ने स्वर्ण और अमेरिका की कैरिसा यिप (2601) ने रजत पदक अपने नाम किया। बोर्ड चार पर वंतिका अग्रवाल ने 2437 की परफॉर्मेंस के साथ कांस्य पदक जीता, जहां कज़ाख़स्तान की एल्नाज़ कालियाख़मेत (2486) ने स्वर्ण और क्यूबा की इनेयमिग हर्नांदेज़ गिल (2443) ने रजत पदक हासिल किया। बोर्ड दो पर अमेरिका की एलिस ली (2572) ने स्वर्ण, आर्मेनिया की मरियम मक्रतच्यान (2544) ने रजत और चीन की युक्सिन सोंग (2492) ने कांस्य पदक जीता।

2024 के बुडापेस्ट ओलंपियाड में पहली बार महिला वर्ग का स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम इस बार अपना खिताब बचाने में नाकाम रही और चीन व कज़ाख़स्तान से पिछड़कर कांस्य पदक पर सिमट गई। फिर भी लगातार दूसरी बार पोडियम पर जगह बनाना और चार खिलाड़ियों का बोर्ड पुरस्कार जीतना भारतीय महिला शतरंज के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। अमेरिका चौथे, पोलैंड पांचवें, आर्मेनिया छठे और मंगोलिया सातवें स्थान पर रहीं, जबकि जॉर्जिया आठवें, वियतनाम नौवें और स्लोवेनिया दसवें स्थान पर रही।