आसियान प्लस इंडिविजुअल ओपन शतरंज चैंपियनशिप जीतकर रचा इतिहास, पहली बाजी हारने के बाद 8 में से 7 अंक बनाए
दीपावली के शुभ दिन भारतीय शतरंज को वह तोहफा मिला जिसका सभी को लंबे समय से इंतजार था। मध्य प्रदेश के कटनी के इंटरनेशनल मास्टर अनुज श्रीवात्री ने 7वीं आसियान प्लस इंडिविजुअल ओपन शतरंज चैंपियनशिप 2026 का खिताब जीतकर ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल कर लिया है। इसके साथ ही अनुज भारत के 100वें और मध्य प्रदेश के पहले ग्रैंडमास्टर बन गए हैं।
अनुज के लिए इस टूर्नामेंट की शुरुआत अच्छी नहीं रही। पहले ही राउंड में वे फिलीपींस के इंटरनेशनल मास्टर क्रिश्चियन जियान कार्लो आर्का से हार गए। इसके बाद उन्होंने जबरदस्त वापसी की और बाकी आठ बाजियों में 6 जीत और 2 ड्रॉ के साथ 7 अंक बनाए।
दूसरे राउंड में उन्होंने मंगोलिया के फ़ीडे मास्टर गनबात तेनगुंदलाई को हराया। तीसरे राउंड में उन्होंने मंगोलिया के ग्रैंडमास्टर दशज़ेग्वे शरावदोर्ज को मात दी। चौथे राउंड में उन्होंने भारत के इंटरनेशनल मास्टर एंटोनियो विआनी डिकुन्हा को हराया। पांचवें राउंड में मंगोलिया के इंटरनेशनल मास्टर एर्डेने बासनसुरेन से उनकी बाजी ड्रॉ रही। छठे राउंड में उन्होंने फिलीपींस के फ़ीडे मास्टर अलेखिन नूरी को हराया। सातवें राउंड में उन्होंने वियतनाम के ग्रैंडमास्टर न्गुयेन डुक होआ से अंक बांटे। अंतिम दो राउंड में अनुज ने भारत के इंटरनेशनल मास्टर अमेय औदी और ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेशनल मास्टर जेम्स मॉरिस को हराया और अकेले विजेता के रूप में खिताब अपने नाम किया।
अनुज 2450 रेटिंग और चौथी वरीयता के साथ टूर्नामेंट में उतरे थे। उन्होंने 9 राउंड में 7 अंक बनाए और 2586 की शानदार परफॉरमेंस रेटिंग से खेल दिखाया। इस प्रदर्शन से उन्हें 15 रेटिंग अंकों का फायदा भी हुआ।
Final Ranking after 9 Rounds
Rk. | SNo |
| Name | sex | FED | RtgI | Pts. | TB1 | TB2 | TB3 | TB4 | TB5 | n | w | we | w-we | K | rtg+/- | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
1 | 4 | IM | 2450 | 7 | 2382 | 43 | 46,5 | 0 | 6 | 9 | 7 | 5,50 | 1,50 | 10 | 15 | ||||
2 | 8 | GM | 2427 | 6,5 | 2357 | 41 | 44,5 | 0 | 4 | 9 | 6,5 | 5,55 | 0,95 | 10 | 9,5 | ||||
3 | 27 | FM | 2257 | 6 | 2416 | 42,5 | 46,5 | 0 | 4 | 9 | 6 | 2,67 | 3,33 | 20 | 66,6 | ||||
4 | 18 | IM | 2382 | 6 | 2395 | 42,5 | 45,5 | 0 | 4 | 9 | 6 | 4,74 | 1,26 | 10 | 12,6 | ||||
5 | 1 | IM | 2474 | 6 | 2395 | 37,5 | 41,5 | 0 | 4 | 9 | 6 | 5,65 | 0,35 | 10 | 3,5 | ||||
6 | 7 | IM | 2431 | 6 | 2371 | 40,5 | 43,5 | 0 | 4 | 9 | 6 | 5,50 | 0,50 | 10 | 5 | ||||
7 | 11 | IM | 2416 | 6 | 2369 | 41 | 43,5 | 0 | 5 | 9 | 6 | 5,35 | 0,65 | 10 | 6,5 | ||||
8 | 17 | IM | 2385 | 6 | 2216 | 34 | 36,5 | 0 | 5 | 9 | 6 | 6,53 | -0,53 | 10 | -5,3 | ||||
9 | 15 | IM | 2402 | 5,5 | 2398 | 42,5 | 47 | 0 | 3 | 9 | 5,5 | 4,87 | 0,63 | 10 | 6,3 | ||||
10 | 5 | IM | 2447 | 5,5 | 2387 | 40,5 | 43 | 0 | 4 | 9 | 5,5 | 5,57 | -0,07 | 10 | -0,7 |

भारत का ग्रैंडमास्टर सफर 1988 में शुरू हुआ था, जब विश्वनाथन आनंद देश के पहले ग्रैंडमास्टर बने थे। 39 वर्षों में यह सफर 100 ग्रैंडमास्टर तक पहुंच गया है। इस ऐतिहासिक पड़ाव पर अनुज का नाम दर्ज होना मध्य प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
अनुज का यह सफर संघर्ष और धैर्य की मिसाल है। उन्होंने सात वर्ष की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया था। 2016 में राष्ट्रीय अंडर-13 चैंपियनशिप में वे तीसरे स्थान पर रहे। 2017 में उरुग्वे के मोंटेवीडियो में हुई विश्व युवा अंडर-14 चैंपियनशिप में वे बिना कोई बाजी हारे चौथे स्थान पर रहे। 22 अगस्त 2019 को स्पेन के सेंट एड्रिया टूर्नामेंट में उन्होंने अंतिम नॉर्म हासिल किया और 2400 रेटिंग भी पार की।

इसके साथ वे महज 15 वर्ष 31 दिन की उम्र में मध्य प्रदेश और मध्य भारत के सबसे कम उम्र के इंटरनेशनल मास्टर बन गए थे।
इंटरनेशनल मास्टर बनने के बाद अनुज का अगला लक्ष्य ग्रैंडमास्टर बनना था और वे तेजी से उस ओर बढ़ भी रहे थे। लेकिन इसी बीच आई कोविड महामारी ने उनकी राह रोक दी। लगभग तीन वर्षों तक बोर्ड पर होने वाली शतरंज प्रतियोगिताएं लगभग बंद रहीं। इसका सबसे ज़्यादा नुकसान अनुज जैसे उभरते खिलाड़ियों को हुआ, जो अपने करियर के सबसे अहम दौर में थे। इसके बावजूद अनुज ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। उसी मेहनत का नतीजा आज पूरे देश के सामने है।
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भारत के पहले ग्रैंडमास्टर और पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने भी सोशल मीडिया पर अनुज को बधाई दी। आनंद ने दीवाली की शुभकामनाओं के साथ लिखा कि यह 100 का एक शानदार "पटाखा" है और अनुज ने भारत को इस मील के पत्थर तक पहुंचाया है। आनंद ने एक दिलचस्प संयोग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि आज ही वे सोच रहे थे कि दिसंबर 2027 में उनके ग्रैंडमास्टर बनने के 40 साल पूरे होंगे, और उसी दिन यह उपलब्धि सच हो गई।
अनुज अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं। उनके पिता अशोक श्रीवात्री ने हर कदम पर बेटे का साथ दिया। अनुज के शुरुआती दिनों में कई प्रशिक्षकों ने उनके खेल को निखारने में अहम भूमिका निभाई। इनमें स्वर्गीय वी.के. तिवारी, यशपाल अरोरा, राजेश बहादुर और अनूप देशमुख और निकलेश जैन शामिल हैं।
अनुज की इस उपलब्धि से मध्य प्रदेश में शतरंज को नई ऊर्जा मिलेगी। प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए अब ग्रैंडमास्टर बनना सिर्फ़ सपना नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा लक्ष्य बन गया है जिसे हासिल किया जा सकता है। मध्य प्रदेश शतरंज संघ के सचिव कपिल सक्सेना नें अनुज की इस उपलब्धि और प्रसन्नता जाहिर की है और कहा कि अब हम ग्रैंड मास्टर वाले मध्य प्रदेश है , अनुज की यह उपलब्धि एक शुरुआत है जिसे कई नन्हे खिलाड़ी प्रेरित होंगे और उम्मीद है जल्द ही हमें आयुष शर्मा और माधवेंद्र प्रताप शर्मा से भी यह उपलब्धि मिलेगी.
















