कहते है शतरंज खेल की शुरुआत ही शांति के उद्देश्य को लेकर हुई है और आज भी शतरंज के प्यादे दरअसल देश की सुरक्षा में सबसे आगे खड़े सैनिक का प्रतिनिधित्व करते है । वही प्यादा जो खुद को कुर्बान करके सबको सुरक्षित रखता है । ठीक वैसे ही देश का सैनिक हमें सुरक्षित रखने के लिए अपने प्राणो की कुर्बानी दे देता है ।


खैर शतरंज के खेल में प्यादा अपनी जान देने के बाद बॉक्स में वापस चला जाता है और फिर अगले मैच में वापस आ जाता है पर

असल जीवन में अपने जीवन को कुर्बान करने वाला सैनिक वापस नहीं लौटता । उसके अपने जीवन भर उसका रास्ता देखते है पर वह वापस नहीं लौटता ।
खैर शतरंज के खेल में हर सैनिक को पूरा मौका मिलता है सामने से लड़कर अपनी कुर्बानी देने का या कुछ हासिल करने का पर बिना कोई मौका दिये ही उसे खेल से बाहर कर देना खेल के नियमों के खिलाफ है और ऐसा संभव नहीं है .....

पर असल ज़िंदगी में ऐसा नहीं है । पुलवामा में भारत के वीर सिपाही बिना कोई मौका दिये ही बर्बर तरीके से जीवन के इस शतरंजी खेल से बाहर कर दिये गए...

सियासत अपना काम करेगी हम भी तो कुछ करना सीखे !!

भारत के माननीय प्रधान मंत्री और विपक्ष कांग्रेस के नेता सब एक साथ नजर आए शतरंज मे यह संभव नहीं पर असल जीवन मे यह संभव है और बस यही असल जीवन शतरंज के खेल से बेहतर है ! दुख की इस घड़ी मे देश एकजुट है और यही भारत की ताकत है । ऐसे मे सियासत को जो करना है वह करेगी एक आम नागरिक के भी कुछ कर्तव्य होते है जो उसे करना चाहिए !
क्या कर सकता है शतरंज परिवार !
शतरंज भारत के उन खेलो में से एक है जो सबसे तेजी से बढ़ रहा है और जैसा की विश्व चैम्पियन विश्वानाथन आनंद भी मानते है की यह खेल देश को और दुनिया को अच्छे नागरिक देने की क्षमता देता है । ऐसे में इस खेल को जितना हो सके हमें आगे ले जाने की आवश्यकता है ।
एक शतरंज खिलाड़ी क्या सहयोग कर सकता है अपने सुझाव हमें chessbaseindiahindi@gmail.com पर भेजे और हम उसे प्रकाशित करेंगे








